समाज और सरकार आखिर कब चेतेगा सदी के सबसे बड़े प्रकोप ग्लोबल वार्मिंग से।
चुनाव का माहौल चल रहा है लेकिन अभी तक किसी भी पार्टी ने खुलकर उस मुद्दे पर बात नहीं की जो मानवता के लिए सबसे बड़े खतरे की घंटी है --- ग्लोबल वार्मिंग , हीटवेव ।। आधुनिकता के विकास के मायने में न जाने क्यों हम अपने अस्तित्व पर ही सवाल खड़ा कर दिए हैं, जब दुनिया त्राहि माम करने लगेगी तभी हम चेतेंगे क्या? जब दुनिया तबाही के कगार पे होगी तभी हम चेतेंगे क्या? अगर तब चेतेंगे तब बहुत देर हो चुकी होगी क्योंकि फिर हम बचा नहीं पाएंगे। भारत के कई हिस्सों में तापमान लगभग 50 डिग्री पहुंचता देखा जा रहा है , गरीब जनता, पशु , पक्षी सभी बेचारे त्रस्त हैं, और सरकार इन सबसे बेखबर ।। हम पृथ्वी की दुर्दशा आज से नहीं कई दशकों से करते आ रहे है, अभी भी हम अनभिज्ञ बने हुए हैं जैसे हमें पता ही नहीं की ये जो दुर्दशा हम देख रहे हैं उनमें प्रमुख कारण मांस,डेयरी उद्योग जोकि 16%, फैक्ट्री, ट्रांसपोर्ट, वनों का कटाव (Deforestation) इत्यादि है। इन सभी समस्याओं से निजात पाने के लिए वृक्षारोपण के साथ उसका संरक्षण तो आवश्यक है हि लेकिन हमें ये भी ध्यान में रखना होगा कि मांसाहार की हवस को त्यागे बिना हम प...