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ब्यातिगत= शादी ना करने के पीछे का कारण।

1. बचपन से स्वाभाविक, ब्रह्मचर्य की भावना के वजह से , कामुकता से बचाव के वजह से। 2. गर्भिणी स्त्री को असहनीय दर्द प्रसव के दौरान ,  उस दर्द का कारण नहीं बनना, करुणा के वजह से। 3. संतान के नहीं रहने पे जनसंख्या नियंत्रण के लिए समाज में संदेश देने में प्रभावी। 4. स्वतंत्रता, अतिरिक्त समय मिलेगा जिसका सदुपयोग जीवन में मूल्य बढ़ाने में काम आएगा। 5. व्यक्तिगत परिवार के तनाव से दूर। 6. गरिमायुक्त जीवन, एकांत वाला जीवन, स्वयंशासित जीवन। 7. असीम संभावनाओं वाला जीवन, उच्च निर्णय एवं त्याग वाला जीवन। 8. प्रसिद्धि वाला जीवन। 9. भाइयों से बिछड़ने का, अलग होने का कोई भी कारण न होना,  एक अलग अनुभूति और खुशी देता है.  10. अपनी एक स्वतंत्र पहचान, किसी के भी साथ  न साझे वाली पहचान,  अन्तर्यात्रा . ........ || मई 24/2025 ||

डर को कैसे जीतें,काबू पाएं!!

डर का कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं होता,जैसे अंधकार का कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं होता ,ठीक वैसे ही।। अंधकार क्या है - प्रकाश की गैरमौजूदगी । जब प्रकाश नहीं होगा तब अंधकार होगा। मतलब प्रकाश सर्वत्र है यह स्वतंत्र अस्तित्व है,  सूर्य हमेशा प्रकाशित रहते हैं लेकिन जब कोई स्थान छिपता है तो वहां अंधकार दिखता है। यानि प्रकाश की गैरमौजूदगी ही अंधकार है। इसी तरह डर सिर्फ कल्पना है ,इसका मुख्य वजह अज्ञान है ,जब किसी घटना , वस्तु का बोध हो तो इंसान में विवेक ,समझदारी होती है, उस समय डर नहीं होता। उदाहरण के लिए यदि रात के समय कोई मोटी रस्सी हुबहू सांप की तरह दिखे तो लोग भयभीत हो जाते हैं,लेकिन समझदार इंसान शीघ्र ही पता कर लेता है कि जिसको कल्पना करके वह डर रहा है वह एकमात्र भ्रम है ,रस्सी है । भ्रम टूटा दर खत्म, कल्पना से वास्तविकता में आए डर खत्म । हमारे ज्यादातर डर काल्पनिक होते हैं। लेकिन प्राचीन काल से जब इंसान जंगल से लेकर शहर,गांव तक जीवन विकास  की यात्रा किया है तब से इंसानों का डर ने बहुत साथ दिया है ,यही डर इंसानों की अस्तित्व को आज तक बचाए रखने में सहयोगी भी रही है। कुछ हद तक डर...

डोपामिन एक वरदान है,इसका इस्तेमाल करें।

डोपामिन इंसान के लिए वरदान है, डोपामिन एक न्यूरोट्रांसमीटर है जो मस्तिष्क में एक रासायनिक संदेशवाहक के रूप में कार्य करता है। ये मस्तिष्क के विभिन्न क्षेत्रों में पाया जाता है, जैसे कि यह पुरस्कार और सुख की भावना से जुड़ा है। जब कोई भी काम चाहे छोटा या बड़ा पूरा होता है तो हमें सुख की अनुभूति होती है , ये डोपामिन की वजह से होता है। अब आइए देखते हैं इसका इस्तेमाल कैसे करना है, कोई भी आप  समयानुसार लक्ष्य चुनें जो एक समय  के अंदर आपको पूरा करना हो ,  इसको करने से पहले इस कार्य को कुछ छोटे छोटे भागों में बांट लें और आप पाएंगे कि उन कार्यों को करने में अब आसानी हो रही है क्योंकि काम अब टुकड़ों में बंट गया है और आप पाएंगे कि हर बार जब आपका काम पूर्ण होगा तब डोपामिन मस्तिष्क में उत्सर्जित होके आपको खुशी ,उत्साह देगा जो आपको आपके अगले कार्य के भाग को करने का उत्साह देगा ,और आप पाएंगे कि एक दिन आपका बड़ा कार्य भी संपन्न होगा।

मन की दशा,अवस्था

मन की अवस्था, दशा अजीब होती है,आप महसूस करते होंगे, जो मन कुछ दिनों से परेशान था, किसी वजह को लेकर लेकिन कुछ दिनों में अचानक से ऐसा होता है कि वह मन पटरी पर आ जाता है , मतलब खुशी का एहसास, संतुष्टि का एहसास महसूस करने लगता है। मतलब विचार ही है जो इंसानी मन को दुःखी और सुखी होने पर मजबूर करता है। जैसे अभी किसी नकारात्मक विचारों के बारे में सोचने लगे,जिसे वो बिलकुल पसंद नहीं करता है उसका मन व्यथित और परेशान हो जायेगा। उलट अगर व्यक्ति सकारात्मक विचारों के बारे में सोचे तो उसको प्रसन्नता का एहसास होगा। एक बात और यदि कोई विचार जो आपको परेशान कर। रहा है भले ही उसकी कीमत कौड़ियों में भी न आंकी जाए,कई दिनों तक उस विचार को मन में रखने से अवसाद एवं तनाव हमारे अंदर घर करने लगता है। आदमी का मन बहुत अवसरवादी होता है , एक रास्ता बंद होता है तो वह दूसरे की संभावना तलाशना शुरू करता है । आप देखते होंगे , व्यक्ति चाहे किसी क्षेत्र का हो शिक्षा, व्यवसाय, खेल, संगीत, साहित्य, अभिनय, कला इत्यादि अगर उसे लगे कि उसका लक्ष्य पूरा नहीं हो रहा है या वो असमर्थ है तो वह उसका एक विकल्प या समानांतर व्यवस्था बना ही ...

तुलना छोड़े, तुलना त्यागें,विवेक का इस्तेमाल करें।

इंसान के परेशान ,व्यथित, असंतुष्ट रहने का एक और सबसे बड़ा कारण है बेबुनियादी तुलना। यहां पे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की बात करें तो वो अलग बात है ,लेकिन हम उस तुलना की बात करते हैं जो हमे पंगु बनाता है , ईर्ष्या से ,हिंसा से भर देता है | आइए देखते हैं तुलना का जन्म क्यों बेबुनियाद है, आप जब अकेले हो तो मानिए कि इस दुनिया में आप अकेले है ,सिर्फ आप हैं आप के अलावा कोई नहीं, तीसरा विश्वयुद्ध हो गया है, सिर्फ मानने को ऐसा ।। फिर आप देखेंगे कि आप तुलना कर ही नहीं सकते ,क्यों क्योंकि तुलना हमेशा विपरीत चीजों पर निर्भर होती है। अगर आप दुनिया में अकेले हो तो सोचो आप कैसे बोल सकोगे कि आप गोरे हो या काले हो, लंबे हो या ठिगने हो। कुरूप हो या सुंदर हो। मूढ़ हो या बुद्धिमान हो। अमीर हो या गरीब हो। आप पाओगे कि सिर्फ दुनिया में आप  ही हो  आपकी एक स्वतंत्र हस्ती है, उस समय आपको असीम शांति का एहसास होगा, और वो चीज आप इस वक्त भी महसूस कर सकते हैं, क्योंकि आप जैसा कुदरत ने दूसरा इस संसार में नहीं बनाया है,  लेकिन ये संसार है आपको रहना है , लोगों से व्यवहार भी करना है तो आप  खुद से अनुस्पर्ध...

अनियंत्रित जीवन।।

जिंदगी का बहुत बड़ा हिस्सा हमारे नियंत्रण में नहीं रहता। उदाहरण के लिए जैसे बचपन में खिलौनों, मेलों, खेलने में रुचि। जवानी में समाज ,दिखावा, पैसों,संपति, रोजगार में रुचि या इच्छा। बुढ़ापे में आराम की इच्छा, आसक्ति। शरीर के समस्त आंतरिक अंगों का सुचारुरूप से चलना , जिसपर हमारा अपना कोई भी वश या नियंत्रण न होना। समय ,दिन और रात इत्यादि का चलना। यहाँ तक कि शादी किससे होनी है कब होनी है इसका भी अधिकतर अंदाज नहीं लगता। हमें जमीन कहां खरीदनी पड़ जाय और कहां की बेचनी पड़ जाए इसका भी अधिकतर हमें अंदाज नहीं लग पाता।  बाद में हमें किस तरह की करियर का चुनाव करना पड़ जाय इसका भी हमें अंदाज नहीं लग पाता। सब मिलाकर समय और नियति हमारे जीवन का अधिकांश भाग चला रही होती है। ये बातें आप गहराई से विचार कर सकते हैं। कभी कभी आप देखते होंगे  , आप घर में आराम फरमा रहे हैं लेकिन अचानक पता चलता है कि आपको किसी ट्रिप पे जाना है। कभी कभी ये भी होता है कि जिस काम की लोगों से आपको अपेक्षा नहीं होती, अचानक से वही काम लोग आपको देते हैं। ऐसी कई चीजें हैं जिनकी हमने आशा नहीं की होती है लेकिन वो घटित होती नजर आ...