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Showing posts from July, 2024

डोपामिन एक वरदान है,इसका इस्तेमाल करें।

डोपामिन इंसान के लिए वरदान है, डोपामिन एक न्यूरोट्रांसमीटर है जो मस्तिष्क में एक रासायनिक संदेशवाहक के रूप में कार्य करता है। ये मस्तिष्क के विभिन्न क्षेत्रों में पाया जाता है, जैसे कि यह पुरस्कार और सुख की भावना से जुड़ा है। जब कोई भी काम चाहे छोटा या बड़ा पूरा होता है तो हमें सुख की अनुभूति होती है , ये डोपामिन की वजह से होता है। अब आइए देखते हैं इसका इस्तेमाल कैसे करना है, कोई भी आप  समयानुसार लक्ष्य चुनें जो एक समय  के अंदर आपको पूरा करना हो ,  इसको करने से पहले इस कार्य को कुछ छोटे छोटे भागों में बांट लें और आप पाएंगे कि उन कार्यों को करने में अब आसानी हो रही है क्योंकि काम अब टुकड़ों में बंट गया है और आप पाएंगे कि हर बार जब आपका काम पूर्ण होगा तब डोपामिन मस्तिष्क में उत्सर्जित होके आपको खुशी ,उत्साह देगा जो आपको आपके अगले कार्य के भाग को करने का उत्साह देगा ,और आप पाएंगे कि एक दिन आपका बड़ा कार्य भी संपन्न होगा।

मन की दशा,अवस्था

मन की अवस्था, दशा अजीब होती है,आप महसूस करते होंगे, जो मन कुछ दिनों से परेशान था, किसी वजह को लेकर लेकिन कुछ दिनों में अचानक से ऐसा होता है कि वह मन पटरी पर आ जाता है , मतलब खुशी का एहसास, संतुष्टि का एहसास महसूस करने लगता है। मतलब विचार ही है जो इंसानी मन को दुःखी और सुखी होने पर मजबूर करता है। जैसे अभी किसी नकारात्मक विचारों के बारे में सोचने लगे,जिसे वो बिलकुल पसंद नहीं करता है उसका मन व्यथित और परेशान हो जायेगा। उलट अगर व्यक्ति सकारात्मक विचारों के बारे में सोचे तो उसको प्रसन्नता का एहसास होगा। एक बात और यदि कोई विचार जो आपको परेशान कर। रहा है भले ही उसकी कीमत कौड़ियों में भी न आंकी जाए,कई दिनों तक उस विचार को मन में रखने से अवसाद एवं तनाव हमारे अंदर घर करने लगता है। आदमी का मन बहुत अवसरवादी होता है , एक रास्ता बंद होता है तो वह दूसरे की संभावना तलाशना शुरू करता है । आप देखते होंगे , व्यक्ति चाहे किसी क्षेत्र का हो शिक्षा, व्यवसाय, खेल, संगीत, साहित्य, अभिनय, कला इत्यादि अगर उसे लगे कि उसका लक्ष्य पूरा नहीं हो रहा है या वो असमर्थ है तो वह उसका एक विकल्प या समानांतर व्यवस्था बना ही ...

तुलना छोड़े, तुलना त्यागें,विवेक का इस्तेमाल करें।

इंसान के परेशान ,व्यथित, असंतुष्ट रहने का एक और सबसे बड़ा कारण है बेबुनियादी तुलना। यहां पे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की बात करें तो वो अलग बात है ,लेकिन हम उस तुलना की बात करते हैं जो हमे पंगु बनाता है , ईर्ष्या से ,हिंसा से भर देता है | आइए देखते हैं तुलना का जन्म क्यों बेबुनियाद है, आप जब अकेले हो तो मानिए कि इस दुनिया में आप अकेले है ,सिर्फ आप हैं आप के अलावा कोई नहीं, तीसरा विश्वयुद्ध हो गया है, सिर्फ मानने को ऐसा ।। फिर आप देखेंगे कि आप तुलना कर ही नहीं सकते ,क्यों क्योंकि तुलना हमेशा विपरीत चीजों पर निर्भर होती है। अगर आप दुनिया में अकेले हो तो सोचो आप कैसे बोल सकोगे कि आप गोरे हो या काले हो, लंबे हो या ठिगने हो। कुरूप हो या सुंदर हो। मूढ़ हो या बुद्धिमान हो। अमीर हो या गरीब हो। आप पाओगे कि सिर्फ दुनिया में आप  ही हो  आपकी एक स्वतंत्र हस्ती है, उस समय आपको असीम शांति का एहसास होगा, और वो चीज आप इस वक्त भी महसूस कर सकते हैं, क्योंकि आप जैसा कुदरत ने दूसरा इस संसार में नहीं बनाया है,  लेकिन ये संसार है आपको रहना है , लोगों से व्यवहार भी करना है तो आप  खुद से अनुस्पर्ध...

अनियंत्रित जीवन।।

जिंदगी का बहुत बड़ा हिस्सा हमारे नियंत्रण में नहीं रहता। उदाहरण के लिए जैसे बचपन में खिलौनों, मेलों, खेलने में रुचि। जवानी में समाज ,दिखावा, पैसों,संपति, रोजगार में रुचि या इच्छा। बुढ़ापे में आराम की इच्छा, आसक्ति। शरीर के समस्त आंतरिक अंगों का सुचारुरूप से चलना , जिसपर हमारा अपना कोई भी वश या नियंत्रण न होना। समय ,दिन और रात इत्यादि का चलना। यहाँ तक कि शादी किससे होनी है कब होनी है इसका भी अधिकतर अंदाज नहीं लगता। हमें जमीन कहां खरीदनी पड़ जाय और कहां की बेचनी पड़ जाए इसका भी अधिकतर हमें अंदाज नहीं लग पाता।  बाद में हमें किस तरह की करियर का चुनाव करना पड़ जाय इसका भी हमें अंदाज नहीं लग पाता। सब मिलाकर समय और नियति हमारे जीवन का अधिकांश भाग चला रही होती है। ये बातें आप गहराई से विचार कर सकते हैं। कभी कभी आप देखते होंगे  , आप घर में आराम फरमा रहे हैं लेकिन अचानक पता चलता है कि आपको किसी ट्रिप पे जाना है। कभी कभी ये भी होता है कि जिस काम की लोगों से आपको अपेक्षा नहीं होती, अचानक से वही काम लोग आपको देते हैं। ऐसी कई चीजें हैं जिनकी हमने आशा नहीं की होती है लेकिन वो घटित होती नजर आ...

जिंदगी दुःखालय है ,तो क्या करें?

विषय= जिंदगी दुःखमय है तो क्या करें?? कृपया पोस्ट को पढ़ते समय ईमानदारी और पारदर्शिता अपनाएं 👇👇👇 #नाजन्मक्रान्ति हर एक मुस्कुराते चेहरे के पीछे एक गहरा दर्द छिपा होता है , सोशल मीडिया पे जितने हंसते चेहरे आप देखते होंगे भले ही वो मुस्कुराते नजर आए लेकिन असल कहानी कुछ और होती है, वो दर्द छिपाने का एक जरिया होता है। बात करते हैं इस जीवन के बारे में, जीवन दुःखों से भरा है सुख का सिर्फ आभास मात्र होता है । हर सुख के पीछे दुःख खड़ा होता है, या ये कह लीजिए कि सुख सिर्फ एक नकाब होता है दुःख को छिपाने का ।। आप देखेंगे कि लोग कुछ नया करना चाह रहे क्यों क्योंकि वो पुराने से संतुष्ट नहीं है, दुःखी है। इसीलिए तो जरूरत पड़ती है नए कि, लेकिन वो नया भी हमें संतुष्टि नहीं दे पाता, जैसे आप बोर हो रहे हैं आप घूमने गए लेकिन घूमने के कुछ दिन बाद फिर वही उदासी, और उदाहरण देखते हैं, अब जैसे कोई व्यापार शुरू करे,नौकरी करे, कोई नया काम करें उसके बाद भी एक नई परेशानी मेहमान बनकर आ खड़ी होती है, चलिए एकदम सूक्ष्म चीजों को देखते हैं,विचार करते हैं अब किसी नए जगह जाइए घूमने के इरादे से तो आप पाएंगे कि कुछ दिनो...

जिंदगी दुःखालय है, तो क्या करें ?

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कृपया पोस्ट को पढ़ते समय ईमानदारी और पारदर्शिता अपनाएं 👇👇👇 #नाजन्मक्रान्ति हर एक मुस्कुराते चेहरे के पीछे एक गहरा दर्द छिपा होता है , सोशल मीडिया पे जितने हंसते चेहरे आप देखते होंगे भले ही वो मुस्कुराते नजर आए लेकिन असल कहानी कुछ और होती है, वो दर्द छिपाने का एक जरिया होता है। बात करते हैं इस जीवन के बारे में, जीवन दुःखों से भरा है सुख का सिर्फ आभास मात्र होता है । हर सुख के पीछे दुःख खड़ा होता है, या ये कह लीजिए कि सुख सिर्फ एक नकाब होता है दुःख को छिपाने का ।। आप देखेंगे कि लोग कुछ नया करना चाह रहे क्यों क्योंकि वो पुराने से संतुष्ट नहीं है, दुःखी है। इसीलिए तो जरूरत पड़ती है नए कि, लेकिन वो नया भी हमें संतुष्टि नहीं दे पाता, जैसे आप बोर हो रहे हैं आप घूमने गए लेकिन घूमने के कुछ दिन बाद फिर वही उदासी, और उदाहरण देखते हैं, अब जैसे कोई व्यापार शुरू करे,नौकरी करे, कोई नया काम करें उसके बाद भी एक नई परेशानी मेहमान बनकर आ खड़ी होती है, अब आते हैं जो मुख्य और असली बात है।। जब आपके घर में किसी का जन्म होता है तो बेशक आपको खुशी का एहसास होगा , लेकिन उससे कई गुना ज्यादा तकलीफ ,दुख तब होगा ...