डर को कैसे जीतें,काबू पाएं!!
डर का कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं होता,जैसे अंधकार का कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं होता ,ठीक वैसे ही।। अंधकार क्या है - प्रकाश की गैरमौजूदगी । जब प्रकाश नहीं होगा तब अंधकार होगा। मतलब प्रकाश सर्वत्र है यह स्वतंत्र अस्तित्व है, सूर्य हमेशा प्रकाशित रहते हैं लेकिन जब कोई स्थान छिपता है तो वहां अंधकार दिखता है। यानि प्रकाश की गैरमौजूदगी ही अंधकार है। इसी तरह डर सिर्फ कल्पना है ,इसका मुख्य वजह अज्ञान है ,जब किसी घटना , वस्तु का बोध हो तो इंसान में विवेक ,समझदारी होती है, उस समय डर नहीं होता। उदाहरण के लिए यदि रात के समय कोई मोटी रस्सी हुबहू सांप की तरह दिखे तो लोग भयभीत हो जाते हैं,लेकिन समझदार इंसान शीघ्र ही पता कर लेता है कि जिसको कल्पना करके वह डर रहा है वह एकमात्र भ्रम है ,रस्सी है । भ्रम टूटा दर खत्म, कल्पना से वास्तविकता में आए डर खत्म । हमारे ज्यादातर डर काल्पनिक होते हैं। लेकिन प्राचीन काल से जब इंसान जंगल से लेकर शहर,गांव तक जीवन विकास की यात्रा किया है तब से इंसानों का डर ने बहुत साथ दिया है ,यही डर इंसानों की अस्तित्व को आज तक बचाए रखने में सहयोगी भी रही है। कुछ हद तक डर...