मन की दशा,अवस्था

मन की अवस्था, दशा अजीब होती है,आप महसूस करते होंगे, जो मन कुछ दिनों से परेशान था, किसी वजह को लेकर लेकिन कुछ दिनों में अचानक से ऐसा होता है कि वह मन पटरी पर आ जाता है , मतलब खुशी का एहसास, संतुष्टि का एहसास महसूस करने लगता है।
मतलब विचार ही है जो इंसानी मन को दुःखी और सुखी होने पर मजबूर करता है।

जैसे अभी किसी नकारात्मक विचारों के बारे में सोचने लगे,जिसे वो बिलकुल पसंद नहीं करता है उसका मन व्यथित और परेशान हो जायेगा।
उलट अगर व्यक्ति सकारात्मक विचारों के बारे में सोचे तो उसको प्रसन्नता का एहसास होगा।
एक बात और यदि कोई विचार जो आपको परेशान कर। रहा है भले ही उसकी कीमत कौड़ियों में भी न आंकी जाए,कई दिनों तक उस विचार को मन में रखने से अवसाद एवं तनाव हमारे अंदर घर करने लगता है।

आदमी का मन बहुत अवसरवादी होता है , एक रास्ता बंद होता है तो वह दूसरे की संभावना तलाशना शुरू करता है ।
आप देखते होंगे , व्यक्ति चाहे किसी क्षेत्र का हो शिक्षा, व्यवसाय, खेल, संगीत, साहित्य, अभिनय, कला इत्यादि अगर उसे लगे कि उसका लक्ष्य पूरा नहीं हो रहा है या वो असमर्थ है तो वह उसका एक विकल्प या समानांतर व्यवस्था बना ही लेता है।
या उसका मन एक नया विकल्प ढूंढकर उसमें अपने अहंकार को पोषित करता है।

और कभी कभी इंसान किसी ऐसी चीज ,घटना, व्यवहार, के बारे में इतना अधिक विचार करने लग जाता है कि उसे अपनी इहलीला समाप्त करनी पड़ती है या आत्महत्या करनी पड़ती है।

जबकि वही विचार किसी के लिए कुछ भी नहीं होता है।
ये निर्भर करता है कि कौन सी स्थिती किसी मन के लिए कैसी है ।
मनोविज्ञान का विषय बहुत बड़ा है ।
अथाह सागर है , वैज्ञानिकों ने अथाह ,अनंत मनोविज्ञान रूपी सागर से सिर्फ और सिर्फ कुछ ही मात्र आंशिक ही हस्तगत किया है।
क्योंकि हमारे मानवी मन की अनंत और असीम संभावनाएं हैं।

तो अपनी यात्रा करते रहिए अपना और अपने मन का अवलोकन करते रहिए।
संभावनाओं को तलाशते रहिए।।

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