जिंदगी दुःखालय है, तो क्या करें ?
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#नाजन्मक्रान्ति
हर एक मुस्कुराते चेहरे के पीछे एक गहरा दर्द छिपा होता है , सोशल मीडिया पे जितने हंसते चेहरे आप देखते होंगे भले ही वो मुस्कुराते नजर आए लेकिन असल कहानी कुछ और होती है, वो दर्द छिपाने का एक जरिया होता है।
बात करते हैं इस जीवन के बारे में,
जीवन दुःखों से भरा है सुख का सिर्फ आभास मात्र होता है ।
हर सुख के पीछे दुःख खड़ा होता है, या ये कह लीजिए कि सुख सिर्फ एक नकाब होता है दुःख को छिपाने का ।।
आप देखेंगे कि लोग कुछ नया करना चाह रहे क्यों क्योंकि वो पुराने से संतुष्ट नहीं है, दुःखी है। इसीलिए तो जरूरत पड़ती है नए कि, लेकिन वो नया भी हमें संतुष्टि नहीं दे पाता, जैसे आप बोर हो रहे हैं आप घूमने गए लेकिन घूमने के कुछ दिन बाद फिर वही उदासी,
और उदाहरण देखते हैं,
अब जैसे कोई व्यापार शुरू करे,नौकरी करे, कोई नया काम करें उसके बाद भी एक नई परेशानी मेहमान बनकर आ खड़ी होती है,
अब आते हैं जो मुख्य और असली बात है।।
जब आपके घर में किसी का जन्म होता है तो बेशक आपको खुशी का एहसास होगा ,
लेकिन उससे कई गुना ज्यादा तकलीफ ,दुख तब होगा जब कोई आपको छोड़के हमेशा के लिए विदा होगा ,आप
असहाय और अतिबेचैनी महसूस करेंगे, लेकिन आप विवश रहेंगे ये तकलीफ लगभग सभी को महसूस होंगे,
तो यहां हम देखते है मृत्यु का दुःख जन्म के सुख से कई गुना ज्यादा है।
निष्कर्ष ::-- अगर हमारा जन्म नहीं होता तो हमें ये तकलीफ नहीं झेलनी होती, कोई ये कहे सुख भी तो मिलता है जीवन में लेकिन भाई आप ये भी तो देखें दुःख उससे कई गुना ज्यादा भी तो है।
फिर आपको बुढ़ापे का सामना भी करना है जो कि अत्यधिक दुःख, कष्ट, बेचैनी,बेबसी और गरिमाहीन जिंदगी जीने पर मजबूर करेगी।।
और हमारे ग्रंथों में भी है कि ये जीवन दुःखो का घर है , दुःखालय है सुख तो सिर्फ छलावा है आवरण मात्र है,
लेकिन जब पैदा हो गए हो तो कुछ तो करना है ,करना पड़ेगा क्योंकि जिंदगी काटनी भी तो है,
इसीलिए किसी माकूल वजह को ढूंढो और उसी में जिंदगी खफा दो ये दुःख आए या सुख का अहसास बस अपने वजह पे टिके रहो।
बाकि हम एक विचारक हैं विचार करते रहें, जिंदगी में अवलोकन करते रहें और मुक्ति क्या है उसके बारे में सोचते रहें, जन्म , मृत्यु के चक्र से मुक्ति चाहिए, शाश्वत चाहिए। ---- करुणेश पाण्डेय (विचारक, संस्थापक टीई फाउण्डेशन)
#thinkersevolutions
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