अनियंत्रित जीवन।।
जिंदगी का बहुत बड़ा हिस्सा हमारे नियंत्रण में नहीं रहता।
उदाहरण के लिए जैसे बचपन में खिलौनों, मेलों, खेलने में रुचि।
जवानी में समाज ,दिखावा, पैसों,संपति, रोजगार में रुचि या इच्छा।
बुढ़ापे में आराम की इच्छा, आसक्ति।
शरीर के समस्त आंतरिक अंगों का सुचारुरूप से चलना , जिसपर हमारा अपना कोई भी वश या नियंत्रण न होना।
समय ,दिन और रात इत्यादि का चलना।
यहाँ तक कि शादी किससे होनी है कब होनी है इसका भी अधिकतर अंदाज नहीं लगता।
हमें जमीन कहां खरीदनी पड़ जाय और कहां की बेचनी पड़ जाए इसका भी अधिकतर हमें अंदाज नहीं लग पाता।
बाद में हमें किस तरह की करियर का चुनाव करना पड़ जाय इसका भी हमें अंदाज नहीं लग पाता।
सब मिलाकर समय और नियति हमारे जीवन का अधिकांश भाग चला रही होती है।
ये बातें आप गहराई से विचार कर सकते हैं।
कभी कभी आप देखते होंगे , आप घर में आराम फरमा रहे हैं लेकिन अचानक पता चलता है कि आपको किसी ट्रिप पे जाना है।
कभी कभी ये भी होता है कि जिस काम की लोगों से आपको अपेक्षा नहीं होती, अचानक से वही काम लोग आपको देते हैं। ऐसी कई चीजें हैं जिनकी हमने आशा नहीं की होती है लेकिन वो घटित होती नजर आती है।
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